अब किससे शिकवा करें, जब अपना ही दिल बेवफाई कर गया?
Whether it's classical poetry or a brand new development, the beginning of each creation is associated with the deep encounter of its creator. The difference between an ordinary poem and an awesome Shayari lies in its capability to contact the guts and make the reader sense comprehended.
बिछड़ना तक़दीर में था, वरना, कौन किसी को दिल से निकाल सकता है?
अब ना कोई शिकवा है, ना कोई मलाल, जिसे जाना था, वो चला गया… बस इतना ही हाल।
प्यार तो था, पर किस्मत ने साथ छोड़ दिया।
तुमसे दूरी ने हर चाहत को खामोशी में बदल दिया…!!!
अब दर्द की आदत सी हो Sad Shayari गई है, खुशी मिले तो अब डर सा लगता है।
वो जो कहते थे कभी तुम्हें छोड़ नहीं सकते, आज उन्होंने ही हमें छोड़ दिया।
तेरी यादों के साये मुझे हर रोज़ जलाते हैं।
क्या सच में तुमसे बिछड़कर जीने का कोई तरीका है?
अब तो बस ख़ामोशी से दर्द का इलाज करते हैं।
किसने छुप के या खुलेआम किया प्यार नहीं।
अब तेरे बिना ही समझ रहे हैं कि क्या खो दिया।
दर्द जब हद से गुज़र जाए, तो आंसू भी साथ छोड़ देते हैं।